
भारत की बिगड़ती वायु गुणवत्ता सुर्खियों में छाई हुई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQLI) के अनुसार, यदि भारत की वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सूक्ष्म कण प्रदूषण संबंधी दिशानिर्देशों के अनुरूप हो जाए, तो एक औसत नागरिक की आयु 4.3 वर्ष अधिक हो जाएगी। प्रदूषित वायु के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं को हाल ही में राज्यसभा सांसद वंदना चव्हाण ने भारतीय संसद में उठाया। अपने भाषण में उन्होंने AQLI के निष्कर्षों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में प्रदूषण का लोगों के जीवन पर कितना गहरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि भारत के वायु प्रदूषण कानूनों में नागरिकों के स्वास्थ्य और उत्पादकता को प्राथमिकता दी जाए और भारतीय वायु अधिनियम में संशोधन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की रक्षा करना उन लगभग सभी देशों के कानूनों का प्रमुख उद्देश्य है जिन्होंने वायु प्रदूषण से सफलतापूर्वक निपटा है।